Extraordinary Memory Power of Jain Sadhus | Mumbai | शतावधान (100)
शत अर्थात् सौ = 100 और अवधान यानि याद रखना ! जैन आचार्य श्री नयचंद्रसागरसूरीश्वरजी महाराजा के शिष्यरत्न महाशतावधानी गणिवर्य श्री अजितचंद्रसागरजी महाराज साहेब के दो शिष्य रत्न मुनि श्री पद्मनाभचंद्र सागरजी महाराज एवं मुनि श्री निर्ममचंद्र सागरजी महाराज शतावधान की सिद्धि के जगत को दर्शन करवाएं... Read More